Saturday, 12 August 2017

क्यों अबतक अलग रहते है मोदी और उनकी पत्नी,आखिर में उठा पर्दा इस राज से


पढिये नरेन्द्र मोदी जी के विवाह की पूरी कहानी और शेयर भी करें...
बैलगाड़ी से गई थी नरेन्द्र मोदी जी की बरात: हिमालय से 1 दिन के लिए आए थे घर !
इस समय गुजरात के मुख्यमंत्री और बीजेपी के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की उम्र 12 वर्ष थी। मोदी अपने परिवार के साथ महेसाणा जिले के वडनगर में रहा करते थे। तभी एक साधू वडनगर आया। मोदी की मां हीराबा से उस साधू ने बेटों की कुंडली मांगी। हीराबा ने मोदी के साथ उनके बड़े भाई सोमभाई की भी कुंडली दिखाई।
साधू ने सोमभाई की कुंडली देखकर कहा... इसका जीवन तो सामान्य ही रहेगा, लेकिन तुम्हारे छोटे बेटे मोदी का जीवन उथल-पुथल भरा रहेगा। इसकी कुंडली में ऐसा योग है कि यह या तो एक दिन राजा बनेगा या फिर शंकराचार्य की तरह एक महान संत की सिद्धि हासिल करेगा।
इसी बीच मोदी की पूजा-पाठ में भी बहुत रुचि हो गई। वे अधिकतर समय पूजा-पाठ में ही व्यतीत करने लगे तो परिजन को चिंता होने लगी कि कहीं ये सचमुच में ही साधू न बन जाए।
मोदी जी को सभी ने बहुत समझाया, लेकिन उनके दिमाग से साधू बनने की बात निकल ही नहीं रही थी। इसी के चलते परिवार ने मोदी की शादी करवा देने का फैसला लिया। उन्हें लगा कि शादी हो जाने के बाद वह परिवार में व्यस्त हो जाएगा।
परिवार ने आनन-फानन में न सिर्फ मोदी की शादी के लिए वधु जशोदाबेन की तलाश कर ली, बल्कि उनके ही गांव जाकर मोदी की शादी भी कर दी। यह वह समय था, जब बड़ों के फैसलों का छोटे विरोध नहीं कर सकते थे और इस समय बाल विवाह प्रचलित था।
इस समय देश में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय मोदी द्वारा अपनी पत्नी जशोदाबेन के नाम का जिक्र करना ही है। उनकी पत्नी का नाम जशोदाबेन है। इसीलिए अब मोदी की शादी के गुजरे इतिहास के कई पन्ने खुल रहे हैं। इन सभी के बीच मोदी पर किताब लिखने वाली लेखिका कालिंदी रांदेरी ने कई बातों से पर्दा उठाया है।
मां से कहा, मैं हिमालय पर जाना चाहता हूं :-
शादी के बाद मोदी ने मैट्रिक की परीक्षा पास की। अब वे बड़े हो चुके थे और परिवार ने तय किया कि अब मोदी की पत्नी को घर बुला लेना चाहिए। अभी तक जशोदाबेन का गौना नहीं हुआ था और वे अपने माता-पिता के साथ ही रहा करती थीं। यह बात सुनते ही मोदी ने न कह दिया और कहा कि उन्हें वैवाहिक जीवन में कोई रुचि नहीं। वे साधू बनना चाहते हैं और इसके लिए हिमालय पर जाने की तैयारी कर रहे हैं।
परिजन मोदी को मनाते रहे, लेकिन मोदी अपनी जिद पर ही अड़े रहे। हालांकि मोदी मां हीराबेन का बहुत सम्मान करते थे। वे उनका आदेश नहीं टाल सकते थे। इसलिए उन्होंने मां से कहा कि मैं तुम्हारी मर्जी और आशीर्वाद के बगैर नहीं जा सकूंगा, लेकिन फिर भी मैं आपसे कहना चाहता हूं कि मुझे साधू बनना है। मोदी की जिद के आगे खुद मां हीराबा झुक गईं और उन्होंने मोदी को वैवाहिक बंधन से मुक्ति पाने और साधू बनने का आशीर्वाद दे दिया।
क्यों वापस मोदी?
इसके बाद मोदी हिमालय की कंदराओं में जा पहुंचे और साधुओं के साथ रहने लगे। साधुओं के साथ वे ईश्वर की तलाश में दर-दर भटकते रहे। हालांकि उनकी उम्र अब भी बहुत छोटी थी, लेकिन फिर भी वे जीवन के वास्तविक अर्थ की तलाश में निकल पड़े थे।
उनकी छोटी सी उम्र को देखते हुए एक साधू ने उन्हें समझाया कि ईश्वर की तलाश समाज की सेवा करके भी की जा सकती है। इसके लिए साधू बने रहने की कोई जरूरत नहीं।
इसके बाद मोदी हिमालय से वडनगर वापस आ गए। लेकिन फिर भी उन्होंने अपना वैवाहिक जीवन शुरू नहीं किया। दरअसल वे अपने घर सिर्फ एक दिन के ही लिए आए थे। परिवार भी अब पूरी तरह समझ चुका था कि मोदी को सांसारिक जीवन में रुचि नहीं।
परिजन ने उनकी पत्नी जशोदाबेन के परिजन को भी सूचना दे दी थी कि वे मोदी को वैवाहिक बंधन से मुक्ति दे दें। इसके लिए पूरे परिवार ने जशोदाबेन के परिवार से माफी मांगी। मोदी के परिजन को इस फैसले का दुख था, लेकिन मोदी अपनी जिद पर अडिग थे।
माता को दुख, पिता को अंतिम समय तक रहा रंज :
लेखिका कालिंदी रांदेरी के शब्दों में.. मैं जब मोदी की मां हीराबा से मिली तो उनकी आंखों में आंसू ही थे। उनका कहना था कि मोदी के मर्जी के खिलाफ उनकी शादी कराना जीवन की सबसे बड़ी भूल थी। हीराबा ने बताया कि मोदी के पिता को तो अंतिम समय तक इस बात का रंज रहा कि उन्होंने जबर्दस्ती मोदी पर शादी थोप दी थी।
मोदी की बारात बैलगाड़ी में गई थी। विवाह के बाद मोदी अपने परिवार के साथ वापस घर आ गए थे। परिवार ने निश्चय किया था कि मोदी की मैट्रिक की परीक्षा पास करने के बाद बहू का गौना करवा लिया जाएगा। लेकिन इसके बाद ही मोदी वैवाहिक बंधनों से अपने आपको मुक्त कर हिमालय की कंदराओं में जा पहुंचे। वे हिमालय से वापस आए भी तो सिर्फ एक दिन के लिए ही।